व्यंग्य-लॉक प्रोफ़ाइल से फ्रेंड रिकवेस्ट का आना
बड़ी दुविधा हो जाती है जब पाठकों की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है और मैं देखता हूं प्रोफ़ाइल लॉक है।चौराहे पर कोई पुराना परिचित मिल जाये तो बात कर सकते है।पर सोशल मीडिया में लोग खुद के चेहरे पर कपड़ा डाल के पूछते है आपने दोस्ती कबूल न कि? मै सोचता हूं लोग प्रोफ़ाइल लॉक क्यो करते होंगे??और जब बंद है तो बंद ही रहने दो।ये खुद के दरवाजे बंद कर के खिड़की से राह चलते आदमी को "मुझसे दोस्ती करोगे?"वाले इशारे भेजने का क्या मतलब?
लड़कियों और महिलाओं का समझ आता है कि कोई मनचले उन्हें परेशान कर सकते है।लेकिन 55 साल के गुप्ताजी को किसने छेड़ना है।उनकी भी प्रोफ़ाइल लॉक है।वो जिंदगी के कौन से राज है जो छुपाना चाहते है।आधी दुनिया को पता है वो पत्नी की क्लेश से घर के बाहर ही रहते है।और ऐसा कुछ भी नही है जो जनता से छुपा है।
देख रहा हु पापा की परियो के साथ अब मम्मी के मगरमच्छ भी प्रोफ़ाइल लॉक करने लगे है।कारण कुछ नही फुटेज खाना वेवजह का।प्रोफ़ाइल में वैसे भी चंद फालतू आवारा दोस्त,चाय सिगरेट की टपरी और ताने देने वाले रिश्तेदार ही होंगे।प्रोफ़ाइल में मेडल के नाम पर एखाद गर्लफ्रेंड या कोई टाइमपास रिलेशन पर टशन देखो भाई साहब की प्रोफाइल है जो लॉक है।
कुल मिला के इंसान की ये फितरत है कि खुद की प्रोफाइल छुपी रहे पर दुसरो की जिंदगी में वो आराम से ताकझांक कर सके।मेरा दावा है प्रोफ़ाइल बंद किये ज्यादातर लोग दोहरी जिंदगी जीते है।एक उनकी खुद की जो कि अंदर से लॉक है और एक वो जो कुछ खास लोगो को दिखाना चाहते है।सचमुच इंसान का चरित्र लॉक प्रोफ़ाइल की तरह है जहां छुपा कर दिखाने को और दिखा कर छुपाने को बहुत कुछ है।
उज्ज्वल जोशी की कलम से
Comments
Post a Comment