आदरणीय की कैची

 

काफी दिनों से अलग अलग शहरों में रहते हुए बालो की कटिंग वही नजदीक के सैलून में करवाने के बाद अपने शहर के पुराने जाने पहचाने सैलून में कटिंग करवाने का अनुभव ही कुछ और है।काफी सालो के बाद पवन भिया के "आदरणीय सैलून" में अपने बेतरतीब बालो का मेक इन इंडिया करवाने पहुचा।

पवन भिया अपने गुड गवर्नेंस के लिए लोकमान्य से बिजलपुर तक प्रसिद्ध है ।उनके सभी भाई बड़े अदब से स्वागत करते है।पवन भिया के बातों में वो जादू है कि उनके ग्राहक उनके पास ही रहते है।पवन भिया ने हालचाल पूछ कर मुझे छोटे के हवाले किया।छोटे को मैं तब से जानता हूं जब वो ट्रेनी था औऱ अब एक्सपर्ट हो गया है।देखते ही उसने बता दिया कि पूर्व के नाईयो द्वारा मेरे बालो का जो सत्यानाश हुआ है ,उसे उसकी कैची उस्तरे से ही ठीक किया जा सकता है।अगले 10 मिनट गुजर गए पीछे के बालों को काटते हुए।मैंने समय देखा तो वो बोला अच्छे सेट बाल चाहिए तो समय मत देखिए।मैंने अपने आप को मनाया।फिर छोटे बोला, पहले वाले ने बराबर बाल मिलाए नही है, इसलिए सबका  विकास बराबर नही है।फिर वो बड़े बालो को कंघी से उलीच उलीच कर छोटे करने लगा।उसकी नजरो में वो विकास की दिशाधारा थी।आगे उसकी नजर सफेद बालों पर पड़ी तो देख के बोला कि सफेद कम और काले ज्यादा है इसलिए कलर मत करना।ये कलर करने से सब सफेद हो जायेगे फिर काला करना भारी पड़ेगा।सफेद भले ही कितना भी स्वाभाविक हो पर काले का मोह यहाँ भी व्यवहारिक है।खैर  काले सफेद पर 15 मिनिट चर्चा के बाद  छोटे ने चाय बुलवाई और मुझसे मन की बात करने लगा।

अगले 15 मिनट हो गए थे मुझे लग रहा था कि कुछ काया कल्प हो रहा है।पर बीच मे की वो फेशियल और ब्लीचिंग की टिप्स देने लगा तो मुझे लगा कि मुद्दे से भटक रहे है और अब 1 घण्टा होने को है।मैंने छोटे से कहा भाई जल्दी करो समय हो रहा है।तब उसने अपनी कैची को धार दी और धड़ाधड़ मुझे कैशलेस करने लगा।हालांकि विकास के चक्कर मे कटाई इतनी हो गयी थी की काम सही होने के बाद भी हमारे बाल खड़े हो गए थे ।उसने आश्वस्त होकर कहा इधर उधर न जा कर अगली बार उसे मौका दो तो एकदम बढिया बना देगा।

फिर मैंने आईने में देखा और मन को समझाया कि कुछ तो बदला है ।पर सही कहु तो मै मन को दिलासा ही दे रहा था ।

उज्ज्वल जोशी की कलम से

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