पक्षियों की मीटिंग


आज जनता कर्फ्यू की शाम  पक्षियों की एक मीटिंग हुई।सभी पक्षी इंसानो के अचानक इस तरह घरो में बंद होने पर चर्चा कर रहे थे।सबसे  ज्यादा मुर्गा खुश नजर आ रहा था क्योकि इंसान ने उसे एक अरसे से पार्टी कुशीन घोषित कर रखा था।जबकि एक समय था जब लोग उसकी बांग सुनकर  सुबह होने का अंदाज लगाते थे।अब लोग इंतजार करते है किं कब  रात हो और  मुर्गा पार्टी शुरू हो।उसे लगा कि उपरवाले ने उसके साथ इंसाफ किया ।अब इंसान को पता लगेगा कि पिंजरा बंद रहकर मौत  का डर कैसा होता है?

इधर कौवा भी बड़ी देर से सोच में बैठा था।उसका भी इंसानो से पुराना नाता है।वो बोला पुराने लोग बहुत अच्छे थे ।ये आजकल की  जनरेशन खुदगर्ज है।इनके पुरखो की आत्मा की  शांति के लिए पितृपक्ष में  पंद्रह दिन भरपेट खिलाते है वो भी  जबरदस्ती और बाकी दिन इनको हमारा मुंडेर पर बैठना  भी अच्छा नही लगता।तुरन्त भगा देते है  भाई,उन्हें डर रहता है कि मेहमान घर नही आ जाये।

इधर मोर भी परेशान था दुखी था।उससे पूछा कि वो दुखी क्यो है वह  तो संरक्षित राष्ट्रीय पक्षी  है।वो बोला ये इंसानो की कौम  हर जगह मंडराती रहती है।शहर के बाहर जो बचे खुचे  बगीचे है कभी खुश होकर वहाँ  डांस करो तो बेवकूफ लोग  कैमरे लेकर पहुच जाते है।रात में बार डांस देख देखकर इनको लगता है सब इनके लिए ही डांस करते है, प्राइवेसी नाम की चीज नही रही यार।कोयल ने भी इसका समर्थन किया।बोली आजकल तो इन्होंने मेरी  रिंगटोन बना ली है।कॉपीराइट भी ले लिए है।

तोता भी परेशान था उसे भी इंसानो ने बहुत त्रास दिया था।पिंजरे में बंद कर खूब फ़ालतू चीजे बुलवाई थी।अब फलो के बाग रहे नही , किसी तरह गुजर रही थी उसकी भी।अभी परसो  ही गौरैया दिवस गया।इस पर गौरैया से पूछा कि वो क्या सोचती है।वो बोली इंसान ने हमारे प्राकृतिक आवास छीन लिये।अपार्टमेंट बना दिये वहाँ बेमतलब के  पेड़ लगा दिए।उनके पत्तो पर एक नर्म इल्ली भी नही मिलती ।ऐसे में इंसान हमारे ऊपर एहसान जता कर कड़क चावल के दाने देता है,अब बताओ बच्चे कड़क दाने खा सकते है क्या??हम तो किसी दिन सिर्फ दिवस मात्र रह जाएंगे।

गौरैया की बात सुनकर कबूतर से रहा नही गया।वह कभी शाही  पोस्टमेन था ।बाद में डाकतार आने के बाद चचा नेहरू से लेकर  आगे के कांग्रेसियो ने  शांति का प्रतीक बता कर खूब नवाज़ा। इंसानो ने न जाने कब  शांति दूत  से उसे अशान्तिदूत मान लिया।शाम को घरवाली से गुटरगूँ करने पर पाबंदी लग गयी बाद में अपने ही नाम से  कबूतर नेट लग गयी ।गौरैया को दाने और उसे ढीठ होने के  ताने मिलने पर दुखी था बेचारा।

मीटिंग मे और भी पक्षी थे जो इंसानो से परेशान थे और कुछ दिन पॉल्यूशन और गाड़ियों के शोर से मुक्त होने पर खुश नजर आ रहे थे।फिलहाल कर्फ्यू खत्म होने को था।सभी पक्षियों ने  वहाँ उपस्थित मुख्य अतिथि  चमगादड़  को धन्यवाद दिया।आज का दिन शहर में पक्षियों लिए खास था और खास मतलब  सन्नाटे में मैं उनकी आवाज सुन पा रहा था इसलिए इतना कुछ लिख पाया।

उज्ज्वल जोशी की कलम से

Comments

Popular posts from this blog

आदरणीय की कैची

दूरदृष्टि

व्यंग्य-ऑर्गेनिक का बोध