इंजीनियर्स डे पर



दुनिया को सौ गलतियां माफ है पर इंजीनियर को नही।ऐसा बोला जाता है कि "इंजीनियर , तू कुछ भी कर सकता है"।और ये सुनकर वो फुला नही समाता और हर आता जाता उड़ता तीर ले लेता है।काम हो गया तो ठीक वरना "कैसा इंजीनियर है तू "।

घर मे मच्छरदानी लगाने दीवार पर एक ही  खूंटी हो पर अपेक्षा की जाती की वो बाकी तीन भी हवा में बांध दे,वो होता है असली इंजीनियर।घर की कोई चीज खराब हो जाये तो इंजीनियर।वो अपने पैशन के प्रति इतना लगनशील होता है कि,शादी हो रही प्रेमिका के घर की लाइट वाली झालर भी खुशी से लगा कर आता है।उसे आखरी बिदाई तक यकीन होता है कि उसकी इंजी से शायद वो पिघल जाए।

इंजीनियर किसी बात को छोड़ता नही है आसानी से।बहुत बारीक पिसता है।जब तक सामने वाला ये मान न ले कि गलती उसकी ही थी।उसके पास हर सही को गलत और हर गलत को सही ठहराने के लॉजिक होते है।

आधी मशीन और आधा इंसान होता है इंजीनियर।भावनाओ का सॉफ्टवेयर होता है इंजीनियर।एक सुलझा हुआ इंसान होता है इंजीनियर।और क्या कहूँ? वो होता है इसलिए हम कहते है "तू कुछ भी कर सकता है।"

सभी इंजीनियर्स को इंजी दिवस की शुभकामनाये।अच्छा लगे तो शेयर करे।

कवि उज्ज्वल जोशी
Mechanical Engineer

#EngineersDay
#engineeringstudents 
#indianengineer

Comments

Popular posts from this blog

आदरणीय की कैची

दूरदृष्टि

व्यंग्य-ऑर्गेनिक का बोध