व्यंग्य-मिक्सोपेथी
आई एम ए के संयोजक जॉन ऑस्टिन जयलाल जी की तकलीफ जायज है।वास्तव में पैथी परिवर्तन हो या चिकित्सान्तरण दोनो स्वास्थ के लिए हानिकारक है।प्यूअर वो प्यूअर है और प्यूरिटी को बनाये रखने की जरूरत है।विशुद्ध अंग्रेजी दवाई और देसी जंगली जड़ीबूटी की प्रकृति अलग अलग है।कलर अलग अलग है।फिर दोनों एक कैसे हो सकते है।
सर जॉन ऑस्टिन जयलाल जी दो चीजो को बिल्कुल मिक्स नही करना चाहिए।इससे न इंसान इधर का रहता है न उधर का। मिक्स करना मिक्स होना ये वास्तव में बहुत घातक है।मैंने तो सुना है इससे अंदर जहर फैल जाता है।और जहर इस दर्जे का की खुद का अंग ही काटना पड़ जाता है।मरीज दर्द और तकलीफ से बिलबिलाता है।कहता है मेरा अंग काट दो।रोगी का रोग ही बदल जाता है।अब सोचिए आप एलोपैथी और आयुर्वेद को मिला के दवा बनाये तो दवा का नाम क्या होगा??वर्ण संकर दवाइयों के नाम भी वैसे ही हो जाएंगे।अब पैरासिटामोल अरिष्ट या एज़ीथ्रोमाईसिन वटी नाम से लोग भृमित तो होंगे ही,नाम पढ़ के ही तबियत और खराब हो जाएगी।
आप बिलकुल सही कह रहे है जॉन ऑस्टिन जयलाल जी।मिलावट का विरोध तो बनता है।मोदीजी को ऐसा नही करना चाहिए।
उज्ज्वल जोशी की कलम से
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