व्यंग्य-मुफ्त कफन योजना


झारखंड सरकार ने मुफ्त कफ़न योजना का एलान किया है।सोच रहा हु की ये योजना आई कैसे होगी दिमाग में।या तो ये सोचा होगा कि मिडिल क्लास को ये शिकायत रहती है कि उन्हें जीतेजी कुछ भी मुफ्त में नही मिला।सरकार को टेक्स भरभर कर दिया,कम से कम मुफ्त का कफ़न पाकर अगले जनम में वोट तो देगी।

या फिर ये सोचा होगा कि अस्पतालों में इलाज दवाई के पैसे भरने के बाद कुछ बचा ही नही होगा अगले के जेब मे।तो कफ़न ही दे दिया जाए,क्योकि कफ़न में जेब नही होती।

अब टेंडर निकलेगा।निविदा आमंत्रित है,इतने लाख मीटर कफ़न के कपड़े की।टेंडर खुलेगा,टेंडर बटेगा।सबको उसके हिस्से का मिलेगा "कफ़न"।नेताओ मंत्रियों के फोटो खींचे जाएंगे फ्री का" कफ़न" बाटते हुए।कपड़े की क्वालिटी ,कपड़ा मोटा था कि पतला। डेढ़ मिटर लगा कि दो मीटर किस मुर्दे ने नापना है?

आपदा के अवसर पर अर्ज किया है

हाटबाजार लगा है हर चीज बिक रही है।
हवा और दवा दोनो तेजी में बिक रही है।
वहाँ दूर कोने में भीड़ ज्यादा है।
लगता  है  आज मौत सस्ती बिक रही है।

उज्ज्वल जोशी की कलम से

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