व्यंग्य--ज्ञान की टंकी का ओवरफ्लो



बचपन में छत पर लगी पानी की टंकी ओवरफ्लो होती  तो पूरा मोहल्ला बेचैन हो जाता।मैं तुरंत जाकर मोटर बंद करता तब जाकर सबको चैन आता।सोचो दो मिनट एक्स्ट्रा पानी का हम ओवरफ्लो बर्दास्त न करने वाले लोग लॉक डाउन में कितने सहिष्णु हो गए है कि सोशल नेटवर्किंग पर ज्ञान की टंकी फ़ट पड़ी है  और ज्ञान चारो ओर से बह रहा है ।मजाल है कोई कह दे कि " ज्ञान वेस्ट मत करो "बल्कि लोगो को इतना मजा आ रहा है  लोट लगा लगा कर नहा रहे है ।

सच मानिए पता नही कहॉ से  ऑनलाइन योग सिखाने वालो की बाढ़ सी आ गयी।भगवान पतंजलि ने कभी नही सोचा होगा कि योग करने वालो से योग सिखाने वाले ज्यादा हो जाएंगे।कोरोना युग मे लोग लाइक और शेयर कर के ही योग का लाभ ले लेंगे और स्वस्थ भी हों जाएँगे।परसो एक भाई साहब ने फेसबुक पर लाइव आकर जन साधारण की  कुंडलिनी शक्ति जगाने  का पूरा प्रण कर लिया था।तब सिद्ध लोक के वासियो ने उनसे प्रार्थना करी कि आपको कमेंट्स ही चाहिए तो हम देते है,पर कृपया आम आदमी की कुंडलिनी जगा कर सिद्धलोक की जनसंख्या बढ़ाने का प्रयास न करे।

इधर ज्योतिष लोग कैसे पीछे रहते।उन्होंने अपनी ज्योतिष ज्ञान से बताया कि वो कोरोना के बारे में पहले से जानते थे।उनके पास ग्रह नक्षत्रों की प्राचीन पुस्तक भी थी उसमें सब साफ साफ लिखा भी था ।बस प्रकृति माता का आदेश नही था।लॉक डाउन कब खुलेगा ये भी वो उन्हें पता है पर वो बीमारी के जाने के बाद बताएंगे।इधर बीमारी का विशुद्ध तोड़ निकालने का दावा करने वाले महर्षि चरक के प्रपौत्रों की दो सौ से ज्यादा वीडियो तो मैं खुद देख चुका हूं।अब तो मुझे हर पौधे में   दवाई दिखती है।सुबह उठकर किचन गार्डन में  जो हाथ लगता है उसका काढ़ा बना कर पी लेता हूं।

इधर संगीत और नृत्य वाले अलग नही मान रहे।ऑनलाइन क्लासेज में ये भी कहॉ पीछे रहते।घर घर मे तानसेन और माइकल जैक्सन उत्पन्न होने लगे।मुझे लगता है आने वाले समय मे इस सेक्टर में भी दर्शकों और श्रोताओं की भयंकर मंदी आने वाली है।इधर किसी कृषि इंजीनियर ने  वेबिनार पर बिना जमीन के विशुद्ध पानी पर सब्जी उगाने के ज्ञान दिया । तो कोई  पंद्रह दिन के ऑनलाइन सेशन में ही बड़ा उद्योगपति बनाने का दावा कर रहा है ।कोई बाबानुमा ज्ञानी विरक्ति का ज्ञान दे रहा है तो पड़ोस की काकू नए नए कुकिंग चेनल खोल कर संसार की ओर आसक्ति जगा रही है।

ऑनलाइन ज्ञान की टंकी फट पड़ी  है।लगातार ज्ञान बह रहा है।आप बहते हुए देखते रहिए क्योकि अब ये रुकने वाली नही है।हॉ अगर हो सके तो अपने  छोटे से मस्तिष्क के भगोने भर के रख लीजिए।

उज्ज्वल जोशी की कलम से

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