बी पॉजिटिव
व्यंग्य -बी पॉजिटिव
शहर के प्रसिध्द नाले के किनारे चाट का ठेला लगाने वाले सोनू भइया ने कभी न सोचा था कि लोग ऐसे डरपाक निकलेंगे। क्योकि तीन महीने पहले तक लोग पवित्र पावन नाले किनारे उनकी चाट की रेहड़ी पर शाम को नशेड़ियों की तरह खिंचे आते थे और एकदूसरे से चिपक कर लाइन लगा कर खड़े रहते थे।सुगंधित हवा का सेवन कर के धन्य हो जाते और कलकल बहते पानी का लुत्फ लेते हुए उनकी चाट को चटकारे लेकर खाते।
सोनू भइया दुखी थे और उन्हें हँसी भी आ रही थी।उनकी स्वादिष्ट चाट के आगे जिन लोगो को खुली आखों से कभी कुछ न दिखा वो लोग न दिखने वाले वायरस से डर के हाथ धो धोकर मरे जा रहे है।अरे इससे ज्यादा वायरस तो उनकी धुली हुई प्लेट में होते , जिसको धोने के लिए पानी नाले के पास के हेंड पंप से ही लाया होता था।सोनू भिया पर्यावरण प्रेमी व्यवसायी है और कम से कम एक बाल्टी में चार दफे झूटी प्लेट और चम्मच न धुले तब तक वो पानी नही बदलते ।
सोनू भइया बता रहे थे कि उनके यहां का कोई भी गिराक कोरोना से नही मरा।क्योकि उनके कस्टमरों की इम्युनिटी बहुत स्ट्रांग हो गयी थी।होएगी कैसे नही वो कभी भी चाट को ढक कर नही रखते थे।तीन महीने के लोक डाउन से भिन्नाये हुए भइया दावा कर रहे है कि आयुष मंत्रालय उनके काले मटके वाला पानीपुरी का पानी और चीनी मिट्टी की बरनी वाली इमली की चटनी को भी कोरोना औषधि के रूप स्वीकार करे ।एक डोज में ही कोरोना अपने से बड़े वायरसोंन को देख कर ही भाग जाएगा।
हाइजीन और सेनेटाइजर की बात उठाते ही भिया को काटो तो खून नही।उन्होंने बताया कि उनकी दुकान इस कदर चलती थी कि महीनों उन्हें ठेला और बर्निया धोने का समय ही नही मिलता था।अरे ठेला धोना तो दूर वो खुद सीजन में कई हफ़्तों तक नही नहाते थे।उन्हें गुस्सा आ रहा है उन नगर इकाइयों पर जो लंबेचौड़े एडवाइजरी दे रही है।पहले तो सौ की पत्ती में एक हफ्ते का सेनेटाइज हो जाता था।एक हफ्ते तक फिर कोई आदमी पूछने नही आता था।
सोनू भइया बहुत कॉंफिडेंट है बोले पुराने दिन आएंगे।लोग पहले की तरह हाथ मे दोना दिए उनकी स्वादिष्ट चाट खाएंगे।हम हिंदुस्तानी है बड़ी बड़ी चीजे भूल जाते है तो कोरोना क्या चीज है।डरो मत बे।और बी पॉजिटिव कुछ नही होगा।जो सोनू भइया की चाट खाकर नही मरे उनका कोरोना कुछ नही बिगाड़ सकता ।
उज्ज्वल जोशी की कलम से
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