व्यंग्य-ज्ञानी महात्मा
हमने कण कण में भगवान के बारे में सुना था पर कण कण में कोरोना का भय किसने फैलाया??इसका श्रेय जाता है उन ज्ञानी महात्माओं को जिन्होंने समर्पण भाव से व्हाट्स एप और फेसबुक की फॉरवर्ड पोस्ट को फैलाया और किसी किसी ने अपने स्वयं के ज्ञान के दीपक भी जलाये।इन ज्ञानी महात्माओं के अनुयाइयों के कुछ मजेदार किस्से पोस्ट कर रहा हु।
मेरी माँ बहुत भक्तिमय माता है ।ऐसे ही किन्ही महात्मा की चेतावनी का उसकी चेतना पर जबरदस्त असर हुआ।हुवा यू की मेरे पिताजी को सब्जी दाल में कोथमीर(धनिया) का जबरदस्त शौक।बडी मुश्किल से पचास रु का ताजा धनिया वो कहि से लेकर आये।मेरी माँ को एक दिन पहले ही किसी महात्मा ने फोन पर बताया था कि सब्जियां गरम पानी मे धोना है और सूखा कर इस्तेमाल करना है।माताजी ने उस धनिये के बंडल को बड़ी सावधानी से कड़क पानी मे धो दिया और धनिया कोरोना समेत काला पड़ गया।
ऐसे ही मेरे पड़ोस के शर्माजी की वाइफ को किसी ने बताया कि छीक आने से कोरोना फैलता है और गर्म पानी से कोरोना खतम होता है ।उनके पति को बीच रात में किसी कारण 4-5 छीके एक साथ आ गयी।मिसेज शर्मा को लगा कि कोरोना का हमला हुआ है।उन्होंने तुरंत शर्माजी को नींद से उठा कर गर्म पानी नहाने को लगाया।उनके कपड़ो को सूतक के कपड़ो की तरह गर्म पानी मे डलवाया।वो भी रात को तीन बजे।अब तो शर्माजी आसपास देख कर ही छीकते है ।
मेरे एक मित्र ने गर्मी आने से पहले नया AC लगवाया।इसी बीच कोरोना का असर तेज हुआ।तभी किसी ज्ञानी ने उन्हें बताया कि कोरोना के कण AC से फैल जाते है।आज तीन महीने हो गए भाई साहब फेमिली समेत गर्मी में मर रहे है पर ज्ञानी की बात की अवहेलना नही की।
मित्रो ऐसे कई मजेदार किस्से है जिनपर ग्रंथ लिखे जा सकते है।पर एक बात तो तय है कि ज्ञानी महात्माओं की बात का आदर करना हम भारतीयों की संस्कृति में है।आपकी भी ऐसी यादे है तो शेयर करे।
उज्ज्वल जोशी की कलम से
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